Wednesday, 20 November 2019

आखिर क्या किया जाए

कभी कभी समझ नहीं आता की रिलेशनशिप को हैंडल कैसे किया जाये। किसी रिलेशनशिप को जिन्दा रखने के लिए कितने मेहनत और समय लगते है। कभी कभी तो रिश्ता नासूर बन जाता है। समझ में नहीं आता है की इसे  जिन्दा कैसे रखा जाये। लेकिन फसाद का जड़ कम्युनिकेशन का गैप होने के कारण होता है।  बहुत कोई जो हमारे दोस्त और रिश्तेदार होते हैं वे समझाते हैं की रिश्ता को बनाये रखने के लिए कम्युनिकेशन ही एक मात्र उपाय है। ज्यादातर रिश्ते इसीलिए टूट जाते हैं क्योंकि दो लोग आपस में ढंग से बातचीत नहीं कर पाते हैं। वो सोचते हैं की आपस में बात करने से अच्छा कोई दूसरा ढूंढ लिया जाये।  लेकिन जो रिलेशनशिप को झेल रहा होता है तो उसे समझ नहीं आता है की रिलेशनशिप को जिन्दा रखा कैसे जाये?

अब समझा जाये की कोई भी रिश्ते टूटने के कगार पर क्यों पहुंच जाते हैं? 

और काम के जैसे ही रिश्ते को बनाये रखने के लिए मेहनत करना पड़ता है। 
कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिन्हे शायद जैसे है वैसे ही छोड़ दिया जाये तो ठीक होता है। कभी कभी प्यार में कोई इतना पड़ जाता है की अपने पार्टनर की गलती भी नज़र नहीं आती है। यह स्तिथि दोनों तरफ से हौ सकती है। चाहे उस पार्टनर के चलते परिवार को अपमान सहना पड़ता है। ये अपमान करने की प्रक्रिया है वो(पति या पत्नी) किसी परिवार को कण्ट्रोल करने की प्रक्रिया के कारण होता है। जब कोई लड़की शादी करके किसी के घर जाती है। तब उसका आदत अपने घर में काम करने जैसे होता है।  जहाँ रहती थी उसके अनुसार होती है। पत्नी को ससुराल के माहौल में संतुलन बैठाना पति की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।  वैसे में देखा जाये तो संतुलन बनाने की जिम्मेदारी दोनों परिवार अर्थात पति और पत्नी दोनों के परिवार की भी होती है। 

Wednesday, 29 May 2019

मोदी

प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव जीतने की इतनी तलब क्यों है उनको देख कर लगता है चुनाव जित के दम लेंगे।  उनसे जो आधारभूत काम है उनसे हुआ ही नहीं। बीच हिन्दू मुस्लिम मंदिर ये सब मुद्दा जोर पकड़ने लगा था। लेकिन जब से आतंकवादी हमला हुआ है और उसके बाद हमारे सेना  द्वारा जो सर्जिकल हमला  हुआ है। उस हमला को अपने पार्टी के एजेंडे में शामिल कर ऐसे पोस्टर लगवाए जा रहे हैं जैसे लगता हो ये खुद मोदी का ही फैसला था सिर्फ उन्हीं का पहल पर किया गया हमला था।
ये और ही बात है की जिस समय आतंकवादी हमला हुआ था तो बीजेपी के नेताओं ने घटना की जानकारी रहते हुए भी अपने रैली और सांस्कृतिक कर्यक्रम स्थगित नहीं किया था।  यदि उनमें इतनी देशभक्ति थी फिर उन्होंने हमले की जानकारी मिलने के बाद भी अपने कर्यक्रम स्थगित क्यों नहीं किये। मनोज तिवारी के बारे में ये भी न्यूज़ आयी की वे सारी रात नाचते गाते रहे।  उन्होंने कार्यक्रम को स्थगित नहीं किया। यही है इनकी देशभक्ति ?
सर्जिकल स्ट्राइक होने बाद प्रधानमंत्री ने कुछ राजनैतिक सम्मेलन को सबोधित किया जबकि वो उनको रोक सकते थे। 
पाकिस्तानी हमलों को नाकाम करने के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू बिमान को पीछा करते हुए पाकिस्तानी सिमा पर हमारे सैनिक गिरे तो उस बिषय में प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा लेकिन जैसे ही अन्तराष्ट्र्य बिरादरी द्वारा पाकिस्तान पैर दवाब बनाये जाने पर जब हरे बायु सेना पायलट को चोर दिया गया तो वो अपने इसको श्रेय लेते हुआ उस घटना को पायलट प्रोजेक्ट का नाम देते हैं, वह भी सार्वजनिक रूप से ये चीज़ वे तुरंत भी कह सकते थे वह भी कड़े सबो में की पाकिस्तान जल्द से जल्द हरे सैनिक को लौटाए।  नहीं तोह अंजाम बहुत ही बुरा होगा। \
इन साड़ी घटनाओं से पहले जब आतंकवादी हमला हुआ था तोह कॉन्वॉय मूवमेंट को लेकर पहले ही खुपिया बिभागो द्वारा दिया गया सुचना को क्यों नज़रअंदाज़ किया गया ये समझ से परे है जबकि जम्मू कश्मीर में सेना युद्ध की इस्तिथि में रहती है 
हमरे खुफिया तंत्र भी इतने कमजोर हो गए की  कश्मीर में ३०० किलो आर डी एक्स लाया जाता है उनको कानो कान खबर ही नहीं होती है.इतनी कमजोर ख़ुफिअ तंत्र कैसे हो गयी. जबकि रगरीबो के लिए लड़नेवालों की खिलाफ तो तुरंत सबूत ढूढ़ लेती है। फिर उस आतंकी के बारे में कैसे पता नहीं चला की वो इस तरह का हमला करने वाला था।  
हमारे सैनिक सिमा पे तोह जंग लड़ ही रहे हैं लेकिन वे  अपने देश में भी लड़ रहे हैं क्योंकि बहुत सारे सैनिक अपने पेंशन को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कोई इनकी सुध नहीं ले रहा है यदि बीजेपी सर्कार को अपने सैनिको के परती सम्मान का इतना भाव होता तोह वे अपने पांच  कार्यकाल के दौरान ऐसे बहुत से कर्यक्रम चले जिससे सैनिकों को आंदोलन नहीं करना पढता। 
अब ये देखना ही हमरे देश  कितने बेवकूफ है की एक चरे दो देख कर वोट करते हैं की अपने लोकल नेता को वोट करेंगे जो उनके गाओं मोहाली की  धयान देता हो.वैसे भी ये सर्कार कुछ मामलों में तोह अच्छा कर ही रही है लेकिन जो आधारभूत जरूरतें हैं उनके लिए कुछ नहीं कर रही है।  जैसे नौकरी का सवाल हो चाहे भ्रस्टाचार का  बात हो। जब नोटेबंदी किया गया था तब अस्वाशन दिया गया था की की भ्रस्टाचार को जड़ से मिटा दिया जायेगा और नोटेबंदी उसी दिशा में एक मज़बूत कदम है लेकिन ये तोह फुस्कू बेम निकला।
लेकिन अब जब कोई इसके खिलाफ कोई आवाज़ उठता है तो देशद्रोही का नाम दे दिया जाता है. यानी आप अपने सरकार जो हमारे द्वारा चुनी हुयी है उसके कोई सवाल भी नहीं पूछ सकते हैं क्योंकि इससे हम देशद्रोही हो जायेंगे.   

Wednesday, 16 May 2018

दल बदलू नेताओंकी सजा सदस्य्ता रद्द होनी चाहिए?

जब चुनाव होती है तो जनता राजा बन जाती है वो भी नाम मात्र का।जैसे ही चुुुनाव खत्म हो जाती है। जनता को कोई नहीं पुुछता।ऐसे में यदि जनता किसी नेता को जिस पार्टी के माध्यम से चुनती है और चुनने के बाद यदि वो नेता पैसे के प्रलोभन में चुनाव के बाद अन्य किसी और पार्टी के साथ जाता है तो तत्तकाल उसकी सदस्यता रद्द कर देनी चाहिए क्योंंकि यह जनता के वोटों का अपमान है।

Tuesday, 9 May 2017

एन एच का हाल

भारत में लोग बहुत ही धीरे करते हैं। इसका उदहारण है एन एच जो की टाटा होते हुए बहरागोड़ा से कोलकाता की ओर जाती है। उसका निर्माण जिस तेजी से हो रहा है इससे न जाने कितने सालों में बनेगा। इसका निर्माण मशीनों से हो रहा है इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बहुत कम है। मशीनों पर इतनी निर्भरता के बावजूद काम का रफ़्तार बहुत ही धीमी है। इस सड़क का निर्माण कार्य जिस व्यक्ति या कंपनी को दिया गया है। वो या बहुत ही आलसी होंगे या कोई घोटाला कर रहे हैं। क्योंकि जमीन का अधिग्रहण किया जा चूका है। ना  खुद काम करेंगी और ना दूसरे को करने देंगी।
बहुत बार माननीय उच्च न्यायालय ने बहुत बार स्वतः संज्ञान लेकर पटकार भी लगायी है क्योंकि इसका काम बहुत ही धीमे है। इसके बारे में राज्य सरकार भी दायित्व लेती है। लेकिन न ही राज्य सरकार और ना ही केंद्र सरकार इस स्तिथि से निपटने का कोई पहल कर रही है। राज्य सरकार यूँ तो राज्य की विकास का दावा करती है लेकिन एक सड़क जो रोज़मर्रा जीवन के लिए जरूरी है उसके निर्माण में कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रही है।
जब राज्य सरकार राज्य के विकास के लिए झूठ मुठ का ढिंढोरा पीठ रही थी उसमें से कितनी कंपनी ने झारखडं में निवेश किया। कितनी स्थापित हुयी। हाथी को उड़ाने से अच्छा वही प्रोत्साहन स्थानीय लोगों को देती शायद तो आज झारखण्ड के स्तर में बढ़ोतरी होती। 

Sunday, 4 December 2016

कुत्तों का डर

आपने डर का अनुभव किया है ? तो किस चीज़ से डर लगा है आपको ? आप निश्चित तौर से ये कहेंगे की सबसे ज्यादा डर इंसानों से ही लगता है। लेकिन मैं आपको बताता हूँ की मुझे किस चीज़ से डर लगता है। वो चीज़ है कुत्ता।आप जरूर सोचेंगे की  हें आप कुत्ता से डरते हैं ये भी कोई बात हुई! दरअसल मेरे शहर में कुत्तों ने लोगों को परेशान करके रखा हुआ है।अखबार में कुत्तों द्वारा लोगों को काटने की समाचार भरे हुए रहते हैं। कहीं कहीं तो कुत्तों द्वारा काटने के बाद दवाई या इंजेक्शन नहीं होने के समाचार मिलते हैं।  


  पुराने ज़माने में लोग अपने दरवाजे पर लिखते थे "स्वागतम् " लगता था।  आप यदि अनजाने घरों में भी प्रवेश कर रहे हों तो लगता था की आपका स्वागत ही हो रहा है।  चाहे उस घर का कोई व्यक्ति या महिला आपके स्वागत के खड़े न भी हों तो चलता है।  लेकिन आजकल जमाना बदल गया है।  लोग आजकल अपने दरवाजे पर स्वागतम नहीं लिखते हैं बल्कि वे आजकल एक मीडियम साइज की पट्टी रहती है जिसमें लिखा होता है "कुत्तों से सावधान ",


मैं सोचता हूँ की कुत्ते शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया गया है उसमें रहने वाले लोगों के लिए या पालतू कुत्तों के लिए। ये तो सभी जानते हैं की कुत्ते वफादार जानवर होते हैं फिर उससे सावधान क्यों? आप पूछेंगे की ये सवाल कैसा है ? इसका मतलब यह होता है की कोई यदि ऐसा लिखता है इसका मतलब वो अपने आये मेहमानों का स्वागत नहीं करना चाहता है वरन उसको डरना चाहता है।  आजकल लोगो में एक दूसरे के प्रति डर की भावना बहुत ज्यादा हो गयी है।इसलिए बहुत कोई कुत्ते पालते हैं।  हालांकि लोग सदियों से कुत्तों को सुरक्षा के लिए पालते रहे हैं।ना की किसी को डराने के। हर कोई कुत्ते सुरक्षा के  नहीं पालते। कोई लोगों को कुत्ते पालने का शौक भर है।   

 

 



खैर कुत्ता तो आखिर कुत्ता होता है। उसकी अपनी समझ होती है। उसकी अपनी जिज्ञासा होती है। इसीलिए कहीं आप जा रहे हों वो आपको सूंघने का मौका नही छोड़ता है।



आप सोच रहे होंगे की मैं तो कुत्तों के पीछे ही पड़ गया। वास्तव में ये मेरे अंदर का डर है। वास्तव में कुत्तो ने जब भी हमला  करते   है पुरे समुह में हमला करते हैं।

जब भी सबेरे जोगिंग करने जाता हूँ। तो इधर उधर देख कर दौड़ना पड़ता है । कहीं कुत्ता तो पीछे नहीं पड़ गया है।कौन फिर इंजेक्शन के लिए दौड़ता फिरेगा।कुत्ते काट ले तो फिर न जाने सही में रेबीज हो जाय। मैं जहाँ रहता हूँ वहां एक बंगाली परिवार रहता है। वो लोग भी एक कुत्ता पाले हुए हैं। लेकिन उसे अपने घर के अंदर आने नही देते। जिस सीढ़ी से में  उतरता हूँ कुत्ता भी वहीँ सोया रहता है। हटने को कहने से भी नही हटता है।


कभी कभी मैं स्कूल जाने के लिए दोपहिया वाहन इस्तेमाल करता हूँ।और रास्ते में कुत्ते रोड के किनारे खड़े रहते हैं। जब गाड़ी दूर में रहता है तो वे रास्ते को पार नहीं करते हैं। लेकिन जैसे ही गाड़ी नज़दीक आता है तो दौड़ के पार होते हैं। उसी के कारण कुत्ते बेमौत मारे जाते हैं। कभी कुचल कर तो कभी टकराकर।  





Wednesday, 16 November 2016

भविष्य में पानी का खतरा है!

यदि आप सोचेंगे की ऐसे क्या है जो आपको भविष्य में परेशान कर सकती है। ऐसे  में आपको बता दूँ की हमारी सबसे बड़ी समस्या होने वाली है पानी। कहा जा रहा है की भविष्य में जो भी वर्ल्ड वॉर होगी वो पानी पर आधारित होगी।जी हाँ वो भी स्वच्छ पानी ! 

पानी की बचत को लेकर बहुत सारी कोशिशें भी की जा रही हैं। लेकिन ये कोशिश बहुत ही कम स्तर में हो रही है। हाल ही में कुछ लोगों ने रहने के लिए अपार्टमेंट लिया और जब उस अपार्टमेंट में रहने लगे तो पता चला की डीप बोरिंग करने के बावजूद पानी नहीं निकल रही है। इससे उसमें रहने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

जैसे जैसे गर्मी बढ़ रही है लोगों को पानी की दिक्क्तों में भारी इजाफा हुआ है।साथ ही साथ गर्म हवा के कारण लोगों को  परेशानी हो रही है। अभी तक बहुतों की जान लु से हो चुकी है। 

पानी भी मानव जीवन के लिए महत्वपुर्ण स्थान रखता है। कभी पानी हाहाकार मचाता है तो कभी कभी जीवन संबल देने का काम करता है। अभी हाल में रांची के कुछ इलाके में डीप बोरिंग के कारण पानी का स्तर बहुत ही नीचे चला गया है | हम पैड़ तो नहीं लगा रहे हैं। लेकिन पृथ्वी पर छेद पर छेद किये जा रहे हैं ।इस डीप बोरिंग के कारण कुछ क्षेत्रों में तो पानी इतने नीचे चला गया है कि वहाँ के अपार्टमेंट के लिए पानी उपलब्ध नही है ।उन अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों का जीना दूभर  गया है। 




Friday, 20 May 2016

अभिषेक भैया नाराज हो गए ऐश्वर्या से !

हमारे फिल्म इंडस्ट्री में फिल्मों के साथ साथ लगता है रिश्तों में भी अनिश्चितता के भाव आ गए हैं। अभी हाल ही में बहुत सारी जोड़ियों का तलाक हुआ तो कोई खुद ब खुद अलग हो गए। लगता है अब अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय के बीच भी कोई खट पट शुरू हो गई है। 

आइये बताते हैं इस घटना के बारे में। अभी सबरजीत का स्क्रीनिंग रखा गया था जिसमें बच्चन परिवार सब मौजूद थे। फोटो सेसन के दौरान अभिषेक बच्चन अपनी पत्नी ऐश्वर्या को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया। यू ट्यूब में मौजूद वीडियो वायरल हो गया है। 

लगता है इंडस्ट्री में राहु काल चल रहा है। इसीलिए आये दिन बहुत दिनों से साथ रह रही जोड़ियां भी बेतुके बहाने ले कर अलग हो रहे हैं। ऐसे बेतुके बहाने की क्या कहेंगे। जब ये जोड़ियां सफल नहीं थीं तो ठीक था लेकिन जैसे ही सफल होने लगी हैं तो कोई न कोई बहाने मिल जाते हैं इन्हें अलग होने के लिए। 


Sunday, 28 February 2016

आपने रांची की इंटरनेशनल स्टेडियम की हालत देखी ?

रांची इंटरनेशनल स्टेडियम की हालत किसी से छुपी नही है।  इस स्टेडियम की घांस इतनी बेजान लग रही थी की लग ही नहीं रहा था की यह इंटरनेशनल स्टेडियम है।  

Tuesday, 19 January 2016

बोर्ड का एग्जाम नजदीकियां बढ़ा रही हैं।

अभी बहुत सारे जगहों में बोर्ड की परीक्षा पहुँच रही है। जगहों से मेरा तात्पर्य विभिन्न राज्यों से है। क्योंकि समाचार पत्रों के परिशिस्ट में परीक्षा की प्रिपरेशन कैसे करें ? इस बारे में जानकरी दी गयी है। कहीं रिलैक्स हो कर पढ़ने कहा जा रहा है तो कहीं रूटीन से पढ़ने कहा जा रहा है। 

आजकल का टेंशन एकदम अलग तरह का होता है। जबकि पहले जितना पढ़ने का टेंशन नही होता था उतना शिक्षक और मातेश्री और पिताश्री से मार खाने का टेंशन होता था।  

इसी टेंशन की डर से पढाई भी हो जाती थी। 

आजकल के बच्चे को पढाई के अलावा और भी बहुत सारे टेंशन होते हैं। उनका बचपन छिन जा रहा है। कृपया बचपन न छीने और सब्र से काम लें।  

Monday, 18 January 2016

साकरात

साक्रात पर्व मुख्यतः दक्षिण छोटानागपुर क्षेत्रों और बंगाल और ओडिशा में मनाया जाता है। साक्रात पर्व हिन्दुओं धर्मावलम्बी द्वारा मनाये जाने वाले पर्व से अलग है. यह संथालों का कैलेंडर के हिसाब से मनाया है। यह मुख्यतः दो दिन मनाया जाता है। यह पर्व भी उसी दिन आस पास मनाया जाता है जिस दिन हिन्दुओं धर्म मानने वाले मकर सक्रांति मनाया जाता है। 

साक्रात पर्व को साधारणतः नया साल के शुरुआत  अच्छे से होने के लिए मनाया जाता है। उस दिन घर को साफ़ सुथरा किया जाता है। और पुरे घर के फर्श को गोबर से लीपा जाता है।संथालों में गोबर को पवित्र माना जाता है। कोई भी पर्व या पवित्र समारोह में गोबर का प्रयोग किया जाता है। घर साफ़ सुथरा करने के बाद बोंगा किया जाता है। बोंगा में हांडी "राइस बेयर " का प्रयोग किया जाता है।
उसके बाद भोजन की तैयारी किया जाता है। इस अवसर में गुड़ पीठा, जिल पीठा , रोहोड़ दाका जिल उत्तु,नारकल और तिलमिंग पीठा बनाया जाता है।ये सारी रेसिपी मिट्टी की बर्तन में बनाया जाता है।और जो भी रेसिपी  पकाया जाता है उसे पत्तों से बनाया हुआ पत्तों की थाली जिसे "पातड़ा " कहा जाता है में खाया जाता है। और पत्तों से बना हुआ कटोरी जिसे "फुडुग " कहा जाता है। उसमें सब्ज़ी परोसा  जाता है। यह एक तरह का रस्म है जिसे दो दिन तक मनाया जाता है।
उसके बाद पुरे परिवार के साथ भोजन किया जाता है।भोजन करने के बाद सरसों तेल को  हाथ पैर में मला जाता है। ताकि साक्रात बूढ़ी सबों को आशीर्वाद दें।    
इस अवसर में घर आने वाले  मेहमानों को हंडिया पिलाया जाता है। उसके साथ घर में बनाया हुआ जिल पीठा और खजड़ी दिया जाता है। 
साक्रात के दूसरे दिन मुर्गे का बलि साक्रात बूढ़ी को दिया जाता है। ताकि पुरे साल अच्छा से गुजरे। और दूसरे दिन बूढ़ी गांडी नाच के साथ घर घर जा कर चावल और खेजड़ी इक्क्ठा किया जाता है।इस नाच में पुरुष या बच्चे बंदर के वेश में आते है और पुरे गाँव में नाच दिखाते हैं और हंडिया पीकर हर्षोउल्लास के साथ पर्व को मनाया जाता है। 

Sunday, 18 October 2015

हम आदत से मजबूर हैं?

यहाँ झारखण्ड की राजधानी रांची में वर्षों से बस स्टैंड बन रही है।  मेरे देखते हुए ही तीन वर्ष हो गये हैं।  अभी भी बन ही रही है न जाने कब तक बनेगी उसी के चलते उस बस अड्डे की बसें सड़क के किनारे खड़ी रहती हैं। सड़क के किनारे खड़े रहने के कारण अक्सर जाम लगा हुआ रहता है।  

फिर एक दिन सवेरे सवेरे मोर्निंग वाक के लिए निकला तो देखा की उस बस अड्डे से सटे हुए सड़क फिर से बन रही है. जबकि यह सड़क बिलकुल ठीक ठाक है. उस सड़क पर एक दुक्का गड्ढे छोड़ कर खरोंच तक नही हैं।

आप कहेंगे गड्ढे तो थे, इसीलिए बन रही होगी. ये बात भी सही है जहाँ गड्ढे हों तो वहां सड़क बननी ही चाहिए। लेकिन जिस सड़क को अभी मरम्मत की जरुरत है नही तो वो सड़क क्यूँ बने?

बेकार के सड़क निर्माण से सरकार को आर्थिक हानि तो होती ही है साथ ही साथ समय की भी हानि होती है. खासकर जहाँ सड़क में बहुत गड्ढे हों सड़क निर्माण कार्य वहीँ करनी चाहिए. यहाँ बहुत से ऐसे सड़क हैं जहाँ मरम्मत की जरुरत साथ चोड़ीकरण की भी जरुरत है, वहां उस निर्माण कार्य को करनी चाहिए।

और पता चला है की कुछ दिनों में मुख्यमंत्री उस बस अड्डे का उदघाटन करने वाले हैं इसीलिए उस सड़क का निर्माण जोरों पर है.

इस बार हमने बहुमत सरकार दी है ,देखते है ये सरकार हमारी इच्छाओं में कितनी खरी उतरती हैं. हम भारतीय हैं हम कहीं भी एडजस्ट कर सकते हैं, और आदत से मजबूर भी.

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(आपको मेरे लेख कैसे लगा आप कमेंट कर सकते हैं, शेयर कर सकते हैं या हमारी ईमेल shyamchand2009@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं, धन्यवाद) 

Tuesday, 18 September 2012

आज की सबसे मज़ाकिया पहलु ये है की झारखण्ड को आकाल ग्रस्त घोषित किया गया है . लेकिन यहाँ बारिश  थमने का नाम ही नहीं ले रही है . और ऐसे होने से झारखण्ड सरकार आपात फंड से कोई भी राशि खर्च नहीं होने वाली है . अब अधिकारी और सर कार के लिए यह अजीब इश्तिथि है की झारखण्ड को आकाल ग्रस्त घोषित किया जाय या नहीं . 
मेरे ब्लॉग में आप सब का स्वागत है .